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Friday, October 2, 2020

माटी के करजदार

    🌾🌾माटी के करजदार🌾 🌾


संग्गी जेन माटी ल तै आज भुलाए हस
ईही माटी-महतारी के कोख ले जनम धर तै आए हस
जेन माटी के ननपन म घरबूंदिया तै बनाए हस 
खई समझके इही माटी ल ननपन म तै खाए हस
ऊही माटी ल घाव लगिस त घाव म अपन लगाए हस
तै तो रे संग्गी मोर माटी के करजदार कहलाए हस

संग्गी जेन माटी ल तै आज भुलाए हस
उही माटी म तै खेले कूदे संग्गी साथी जेमा तै बनाए हस
जेन घर म तै रथस रे संग्गी ननपन ले जवानी तोर पोहाय हस 
ऊही घर ल रेे संग्गी तै माटी के बनवाए हस 
तै तो रे संग्गी मोर माटी के करजदार कहलाए हस


संग्गी जेन माटी ल तै आज भुलाए हस
ऊही माटी म तै किसानी करे नागर बख्खर जेमा चलाए हस 
खून पसीना ऐके करके इही माटी म तै कमाए हस
तोर मेहनत के सेती रे संग्गी माटी ले सोना उगलाए हस 
तै तो रे संग्गी मोर माटी के करजदार कहलाए हस


संग्गी जेन माटी ल तै आज भुलाए हस
उही माटी के तै पानी पिए नदिया तरिया म नहाए हस 
आज ऊहि माटी के पानी ल रे संग्गी मैलहा तै बताए हस 
जेन माटी के भात बासी तै खाए आज ऊही ल ठेंगा  दिखाए हस 
तै तो रे संग्गी मोर माटी के करजदार कहलाए हस

संग्गी जेन माटी ल तै आज भुलाए हस
मां बाप के मया दुलार ल तै तो कहां समझ पाए हस
पाल पोस के जेन तोला बड़े करे हे 
अपन पेट ल भूख मारके तोर पेट ल जेन भरे हे 
सब्बो दरद बर तोर अपन खड़े हे आज ओखरे ले अलगाए हस 
इहि माटी म तै पढ़े लिखे हस जीनगी अपन बनाए हस 
मां बाप के साथें मोर माटी के मान घालो बढ़ाए हस 
तै तो रे संग्गी मोर माटी के करजदार कहलाए हस

संग्गी जेन माटी ल तै आज भुलाए हस
ऊहि माटी  हमर पुरखा मनके एके ठा चिन्हा ताय
काम करत कभू थकस त तेहा इहि माटी म थिराए हस 
जेन भाखा जेन संस्कृती ल अपन ननपन ले गोठियाए हस 
उहि भाखा ल बोले बर रे संगी तै आज काबर लजाए हस 
तै तो रे संग्गी मोर माटी के करजदार कहलाए हस

संग्गी जेन माटी ल तै आज भुलाए हस 
जिही माटी म तै खेती करे उही म बिल्डिंग बड़े बनाए हस 
एखरे सेती रे संग्गी मोर माटी ल बंजर तै बताए हस 
दू पैसा के लालच म तैहा देश पराया बस जाए हस 
तै तो रे संग्गी मोर माटी के करजदार कहलाए हस 

                                                  Writer By
                                          Aateshwar Nishad

Thursday, April 2, 2020

मैं यूं ही बेटी नहीं कहलाती


🍁मैं यूं ही बेटी नहीं कहलाती 🍁


मैं यूं ही बेटी नहीं कहलाती
जहां लोग मेरे जन्म को ही 
लक्ष्मी का वास मानते है 
लाडो बिटिया लाडली तो कभी
बेटी नाम से जानते है
महज 
मेरे चरण स्पर्श को सौभाग्य मानते है
मुझे इस संसार में बहू बेटी बहन 
और 
मां के रिश्ते से पहचानते है 


मै यूं ही बेटी नहीं कहलाती
मेरी हंसी किलकारी
घर को उजागर कर जाती है
हर बेटी अपने आंगन की 
फुलवारी कहलाती है
एक पिता के जीने की वजह बन जाती है
पर न जाने फिर भी 
बेटी पराया धन कहलाती है 
बेटी की कमी किसी को महसूस हो या ना हो
पर एक पिता को
उसकी कमी खालती जाती है
और एक बेटी कितनी भी दूर हो पर
वो हर हाल में बेटी होने का फ़र्ज़ निभाती है

मैं यूं ही बेटी नहीं कहलाती
हर बेटी पिता के कहानियों की 
रानी कहलाती है
खुशियों की रवानी ढूंढ़ लाती है
पर
मेरी हर कहानी एक अलग किरदार निभाती है
कभी महिषासुर मर्दनी दुर्गा 
कभी कान्हा की दीवानी राधा
तो कभी 
अंगेजो को ललकारती झांसी की रानी
नजर आती है


मैं यूं ही बेटी नहीं कहलाती
अपनी ही लड़ाई में अकेली रह जाती है
मुश्किल घड़ी में कोई राह नजर न आती है
मगर
ये दुनिया मेरे ही चरित्र पर 
सवाल उठाती है
हर बार
खुद को साबित करने के लिए 
सीता बनकर अग्नि परीक्षा दिलाती है
फिर भी ये समाज 
मेरे ही आबरू पे दाग लगाती है
और महज 
कुछ दहेज के लालच में
मेरे तन को आग जलाती है
ये सब सुन मेरी सांसे थम सी जाती है
आंखे हर बार भर सी आती है 


मैं यूं ही बेटी नहीं कहलाती
एक बेटी ये सवाल हर बार दोहराती है
मेरी काशुर ही क्या रह जाती है 
जो मुझे कोख में ही मार दी जाती है 
बस मै लड़की हूं इसलिए 
किसी गटर या नाली में फेक दी जाती है
मेरी ख्वाहिशों को पैदा होने से पहले 
कुचल दी जाती है
एक कली को फूल बनने से पहले 
तोड़ दी जाती है 


मैं यूं ही बेटी नहीं कहलाती
अपने ही घर में बंदी बन रह जाती है
गली सड़क मुहल्लो में अब 
अकेली चल न पाती है 
क्योंकि ये
हैवान 
हर जगह नजर आती है
दो चार दिन पीछा करने के बाद
प्यार का प्रस्ताव रख दी जाती है
और
मेरी इनकार उन
हैवानों पर भारी पड़ जाती है
तभी तो 
मेरे शरीर में तेजाब डाल दी जाती है
तब भी ये समाज 
आवाज न उठाती है 
उन हैवानों की 
हिम्मत और बढ़ जाती है
उनके हाथ मेरे आबरू तक पहुंच आती है
सरेआम मेरी इज्ज़त को
तार तार कर जाती है
मेरे चरित्र पर दग लगा दी जाती है
इसके बावजूद 
ये समाज मेरे ही कपड़ो पे
सवाल उठाती है 
तब भी
मेरी आवाज़ को कहीं दबा दी जाती है
और जो 
उठ खड़ी होती अपनी 
लड़ाई के लिए वो 
कलयुग की निर्भया कहलाती है
मैं यूं ही बेटी नहीं कहलाती


Writer By :-
Aateshwar Nishad

Sunday, February 2, 2020

तोर मया के चिन्हा

🌸🌼तोर मया के चिन्हा🌼🌸

तोर मया के चिन्हा ल 
सुरता के बंधना म पिरो के रखे हों 
लुगरा के घिरी सहीन घिरो के रखे हों
तै नई मीलेश ता का होइस
तभो ले मोर मन ल तोर बर अभी ले
थिरो के रखे हों


तोर मया के चिन्हा ल 
चिन्हारी रखे हों
मया बर तोर 
मोर आलसी दिल ल  
बनिहारी रखे हों
तोला मोर जिनगी में अही किके 
मोर अंगना में उजयारी रखे हों
तोर सुवागत बर मन के बगीचा
अउ
डगर में मोर मया के फुलवारी रखे हों

तोर मया के चिन्हा ल
आंखी के कजरा बरोबर लगा के रखे हों
तोर खोपा के गजरा असन सजा के रखे हों
अउ
तोरेच चेहरा ल
मोर मन मन्दिर म बसा के रखे हों
सांटी के गुंगरू के आवाज असन
नाम ल तोर गुण-गुणा के रखे हों
मोर पागा के कलगी सहिन लुका के रखे हों

तोर मया के चिन्हा ल
 बसंत ऋतु के आमा मौउर बरोबार
मौउरा के रखे हों
अकती के बिहाव लगिन असन 
भौंउरा के रखे हों
सावन भादो के झड़ी
सहीन 
मोर मया ल तोर बर बरसा के रखे हों
जेठ के घाम असन
बिन पानी के मछली बरोबर 
मोर मन ल तोर मया बर 
तरसा के रखे हों
फागुन के परसाफुल के लाली असन
मोर घर-द्वार ल रंगा के रखे हों

मोर घर के पहुना बारोबर
तोरेेच रददा जोहत रखे हों
एक झलक देखे बर तोर 
गली में भटकत रखे हों
बिन पानी के मोर मया के डोंगा 
ल खोवत रखे हों
तोर दिल म मोर मया के 
धनहा बोवत रखे हों

मोर मन ल अब्बड 
तोरसे मया मतकर कीके टोंकत रखे हों
ये मोर पगला दिल ल 
कोन समझही 
तभो ले
दिन रात तोरेेच बारे में सोचत रखे हों
तोर मया के चिन्हा ल 

Aateshwar Nishad

Thursday, January 16, 2020

तिरंगा

🇮🇳🇮🇳तिरंगा🇮🇳🇮🇳

तिरंगे का तीन रंग मेरी शान है
जहां राम और रहीम 
बजरंग और अली एक जान है 
यहां दीवाली में अली तो 
रमजान में ढूंढ लेते राम भगवान है
और यही मेरे हिंदुस्तान की पहचान है

जहां बंजर मिट्टी से भी सोना उगला दे
अपने खून पसीने से फसल को लहलहा दे
कठिन परिश्रम से पर्वत तोड़ रह बना दे 
धरती चिर पानी बहा दे 
वो एक किसान है 
मेरे देश की शान है
और
 यही मेरे हिंदुस्तान की पहचान है

वन्दे मातरम् राष्ट्रीयगीत
तो 
जन गन मन राष्ट्रीयगान है
संविधान की आन बान है 
देश के हर एक नागरिकों का ये सम्मान है
और 
यही मेरे हिंदुस्तान की पहचान है

जहां की मिट्टी आज भी 
पहली बारिश में भिनी सी सुगंध छोड़ जाती है 
सादे सा पानी आज भी गंगाजल कहलाती है 
और
राधा प्रेमिका तो 
मीरा आज भी श्याम की दीवानी कहलाती है
इतिहास के पन्नों में रचा
राधा और श्याम का प्रेम बलिदान है
इनकी प्रेम कहानी अनोखी और महान है
हमे अपनी संस्कति पर अभिमान है
और 
यही मेरे हिन्दुस्तान की पहचान है

जहां रणभूमि में आजादी के लिए 
लड़े शहीदों के खून से लथपथ मैदान है
जिन्होंने दुशमनों को खदेडने का दिया फरमान है
सुनहरे अक्षरों में लिखा 
उन शुर वीरो के नाम है
और 
यही मेरे हिन्दुस्तान की पहचान है



जहां हर एक मां की आंचल में पलता 
सुरवीर भगत सिंह जैसे जवान है 
लहू का कतरा कतरा
और 
जहां बहन की राखी तो
अर्धाग्नी का सिंदूर भी 
देश के लिए कुर्बान है 
तिरंगे का तीन रंग मेरी शान
और 
यही मेरे हिन्दुस्तान की पहचान है 
Aateshwar Nishad

Wednesday, December 18, 2019

दिल - ए - नदान

♥️♥️💜💙 दिल-- नदान 💙💜♥️♥️


क्या करूं दिल-ए- नदान था
जो तुझसे दिल लगा बैठा  (2)
तुझे निकालने के बजाय दिल के किसी कोने में छुपाए रखा


 मरजी-ए- मोहब्बत है साहब
हो जाती है (2)
वरना काम के तो हम भी थे
इस इश्क़ निकम्मी ने बिगाड़े रखा

कुछ बातें तुझे भी बतानी थी
अपनी हाल -ए-दिल सुनानी थी (2)
मगर क्या करूं
कुछ तेरे तो कुछ मेरे सिने में दबाए रखा
जसबतों को तो हम भी बयां कर दे (2)
पर
दिल टूटने के डर से अपने जसबातों को दफनाए रखा

गुनाह-ए-इश्क़ ही बड़ा 
ज़ालिम है(2)
जिशने सारी सारी रात जगाए रखा
भले ही उसे पाया न हो
मगर
उसकी यादों ने जीना सिखाए रखा

रश्मे-ए-इश्क़ ही 
कुछ ऐसा है कि ये
दुनिया के रीति रिवाजों को
न जाने न माने (2)
पर 
क्या करूं फिर भी तेरे से दिल के रिश्ते निभाए रखा

तूने कभी मेरे दिल की गहराई को 
झांकना न चाहा(2)

और न कभी 
मेरे प्यार की सच्चाई को आंकना चाहा
काश तू मेरे इजहारे-ए-मोहब्बत को समझ पाती 
तुझे पाने की ख्वाहिश को जान जाती (2)
पर 
फिर भी तूने मेरे दिल में आशियाने बनाए रखा


न जाने उसकी मुस्कुराहट में 
क्या जादू था (2)
मेरा उसे निहारने के अलावा कुछ काम न रखा
पता नही क्यों उसके आने की आहट
दूर से चल जाती थी (2)
इसलिए
उसे देखने के लिए बहाने बनाते रखा

किश्मत-ए-लकीरों में
तू भले ही नहीं (2)
मगर 
अपने दिल को तेरे लिए तड़पाते रखा 
पर क्या करूं
ऐसा कोई भी दिन नहीं
जिसमे तुझे रब से मांगने का फरियाद न रखा 


क्या पता कभी न कभी 
तू मिल जाएगी (2)
यही उम्मीद
मुझे अब तक संभाले रखा


क्या करू दिल-ए- नदान था जो 

तुझसे दिल लगा बैठा (2)
तुझे निकालने के बजाय दिल के किसी कोने में छुपाए रखा


Aateshwar Nishad

Sunday, November 24, 2019

हां! डर लगता है

🍁🍂 हां! डर लगता है 🍁🍂

डर लगता है
तूझे बताने से 
अपने प्यार को जताने से 
और
तूझे बात बात पे सताने से

हां डर लगता है
दिल में छुपे कुछ बातों से 
मेरे दबे जसबातो से 

डर लगता है
दुनिया के रस्मो रिवाजों से 
और 
टूटे हुए ख्वाबों से 

हां डर लगता है
तेरे इन आंखों की नमी से 
जब तू मेरे पास न हो उस कमी से

डर लगता है
तेरा यूं मेरे पास आके बैठने के बहाने से 
तेरे चले जाने से 
और 
फिर लौट के न आने से

हां डर लगता है
तेरे रोने से 
तूझे खोने से 
और 
तेरे साथ न होने से

डर लगता है
खुद से किए कुछ कस्मो कुछ वादों से
और 
तूझे पाने के इरादों से

हां डर लगता है
टूटे हुए उन सीशो के टुकड़ों से
और 
सहमे हुए मुखड़ों से

डर लगता है
कच्चे धागों को पिरोने से 
रिश्तों के खिलौने से

हां डर लगता है
तेरे नाम के बगैर दिल को धड़कने से 
और 
तेरे नाम के बगैर मेरे शाम को डलने से

डर लगता है
तेरे रूठने से
तेरा साथ छूटने से

हां डर लगता है
दिल को दोबारा टूटने से 
हां डर लगता है !

Aateshwar Nishad

Sunday, November 10, 2019

दिल की पहेलियां

💞 💞 दिल की पहेलियां 💞 💞


पहेलियां तो बहुत सी सुलझाई है मैंने अपने जीवन की 
मगर कभी
तेरे दिल की पहेलियां न सुलझा सका 

घरौंदे तो बहुत से बनाए है बचपन में 
                            मगर कभी 
तेरे दिल में अपने लिए कभी आशियाना न बना सका

खुद तो बहुत से रिश्ते निभाएं अपने जीवन में
मगर कभी
तेरे दिल का रिश्ता न निभा सका 

बाते तो बहुत से की है खुद से भी औरो से भी 
मगर कभी 
तेरे संग कभी प्यार से बतिया न सका

भाषाएं तो बहुत सी सुनी व समझी है
मगर कभी 
तेरे इन आंखों की भाषा समझ न सका 

तारीफे तो बहुत सी सुनी और की है
मगर कभी
तूझे तेरी खुबसूरती का तारीफ सुना न सका 

खुद का मजाक बनाकर मैंने रोते हुए को भी हंसा दिया
मगर कभी
मैंने खुद की हंसी उड़ाकर तूझे हंसा न सका

वक्त को भी वक्त देकर अपने होने का अहसास दिलाया है 
                         मगर कभी
तेरे साथ कभी वक्त बिताने न मिला

चाहत तो बहुत थी तूझे पाने की 
मगर कभी
तूझे अपनी किस्मत से चूरा न सका

मांगा तो दुआवो में तूझे बहुत 
मगर कभी 
भगवान ने मेरी दुआवो में कभी असर दिखा न सका 

और सायद यही कारण है की

पहेलियां तो बहुत सी सुलझाई है मैंने अपने जीवन की
मगर कभी
तेरे दिल की पहेलियां न सुलझा सका

Aateshwar Nishad