🍁🍂 हां! डर लगता है 🍁🍂
डर लगता है
तूझे बताने से
अपने प्यार को जताने से
और
तूझे बात बात पे सताने से
हां डर लगता है
दिल में छुपे कुछ बातों से
मेरे दबे जसबातो से
डर लगता है
दुनिया के रस्मो रिवाजों से
और
टूटे हुए ख्वाबों से
हां डर लगता है
तेरे इन आंखों की नमी से
जब तू मेरे पास न हो उस कमी से
डर लगता है
तेरा यूं मेरे पास आके बैठने के बहाने से
तेरे चले जाने से
और
फिर लौट के न आने से
हां डर लगता है
तेरे रोने से
तूझे खोने से
और
तेरे साथ न होने से
डर लगता है
खुद से किए कुछ कस्मो कुछ वादों से
और
तूझे पाने के इरादों से
हां डर लगता है
टूटे हुए उन सीशो के टुकड़ों से
और
सहमे हुए मुखड़ों से
डर लगता है
कच्चे धागों को पिरोने से
रिश्तों के खिलौने से
हां डर लगता है
तेरे नाम के बगैर दिल को धड़कने से
और
तेरे नाम के बगैर मेरे शाम को डलने से
डर लगता है
तेरे रूठने से
तेरा साथ छूटने से
हां डर लगता है
दिल को दोबारा टूटने से
हां डर लगता है !
Aateshwar Nishad

Super bro nice line
ReplyDeleteGjb Aatesh Bhai
ReplyDeleteBhai tumhara to jawab nh mja aa gya
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