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Wednesday, December 18, 2019

दिल - ए - नदान

♥️♥️💜💙 दिल-- नदान 💙💜♥️♥️


क्या करूं दिल-ए- नदान था
जो तुझसे दिल लगा बैठा  (2)
तुझे निकालने के बजाय दिल के किसी कोने में छुपाए रखा


 मरजी-ए- मोहब्बत है साहब
हो जाती है (2)
वरना काम के तो हम भी थे
इस इश्क़ निकम्मी ने बिगाड़े रखा

कुछ बातें तुझे भी बतानी थी
अपनी हाल -ए-दिल सुनानी थी (2)
मगर क्या करूं
कुछ तेरे तो कुछ मेरे सिने में दबाए रखा
जसबतों को तो हम भी बयां कर दे (2)
पर
दिल टूटने के डर से अपने जसबातों को दफनाए रखा

गुनाह-ए-इश्क़ ही बड़ा 
ज़ालिम है(2)
जिशने सारी सारी रात जगाए रखा
भले ही उसे पाया न हो
मगर
उसकी यादों ने जीना सिखाए रखा

रश्मे-ए-इश्क़ ही 
कुछ ऐसा है कि ये
दुनिया के रीति रिवाजों को
न जाने न माने (2)
पर 
क्या करूं फिर भी तेरे से दिल के रिश्ते निभाए रखा

तूने कभी मेरे दिल की गहराई को 
झांकना न चाहा(2)

और न कभी 
मेरे प्यार की सच्चाई को आंकना चाहा
काश तू मेरे इजहारे-ए-मोहब्बत को समझ पाती 
तुझे पाने की ख्वाहिश को जान जाती (2)
पर 
फिर भी तूने मेरे दिल में आशियाने बनाए रखा


न जाने उसकी मुस्कुराहट में 
क्या जादू था (2)
मेरा उसे निहारने के अलावा कुछ काम न रखा
पता नही क्यों उसके आने की आहट
दूर से चल जाती थी (2)
इसलिए
उसे देखने के लिए बहाने बनाते रखा

किश्मत-ए-लकीरों में
तू भले ही नहीं (2)
मगर 
अपने दिल को तेरे लिए तड़पाते रखा 
पर क्या करूं
ऐसा कोई भी दिन नहीं
जिसमे तुझे रब से मांगने का फरियाद न रखा 


क्या पता कभी न कभी 
तू मिल जाएगी (2)
यही उम्मीद
मुझे अब तक संभाले रखा


क्या करू दिल-ए- नदान था जो 

तुझसे दिल लगा बैठा (2)
तुझे निकालने के बजाय दिल के किसी कोने में छुपाए रखा


Aateshwar Nishad

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