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Sunday, November 24, 2019

हां! डर लगता है

🍁🍂 हां! डर लगता है 🍁🍂

डर लगता है
तूझे बताने से 
अपने प्यार को जताने से 
और
तूझे बात बात पे सताने से

हां डर लगता है
दिल में छुपे कुछ बातों से 
मेरे दबे जसबातो से 

डर लगता है
दुनिया के रस्मो रिवाजों से 
और 
टूटे हुए ख्वाबों से 

हां डर लगता है
तेरे इन आंखों की नमी से 
जब तू मेरे पास न हो उस कमी से

डर लगता है
तेरा यूं मेरे पास आके बैठने के बहाने से 
तेरे चले जाने से 
और 
फिर लौट के न आने से

हां डर लगता है
तेरे रोने से 
तूझे खोने से 
और 
तेरे साथ न होने से

डर लगता है
खुद से किए कुछ कस्मो कुछ वादों से
और 
तूझे पाने के इरादों से

हां डर लगता है
टूटे हुए उन सीशो के टुकड़ों से
और 
सहमे हुए मुखड़ों से

डर लगता है
कच्चे धागों को पिरोने से 
रिश्तों के खिलौने से

हां डर लगता है
तेरे नाम के बगैर दिल को धड़कने से 
और 
तेरे नाम के बगैर मेरे शाम को डलने से

डर लगता है
तेरे रूठने से
तेरा साथ छूटने से

हां डर लगता है
दिल को दोबारा टूटने से 
हां डर लगता है !

Aateshwar Nishad

Sunday, November 10, 2019

दिल की पहेलियां

💞 💞 दिल की पहेलियां 💞 💞


पहेलियां तो बहुत सी सुलझाई है मैंने अपने जीवन की 
मगर कभी
तेरे दिल की पहेलियां न सुलझा सका 

घरौंदे तो बहुत से बनाए है बचपन में 
                            मगर कभी 
तेरे दिल में अपने लिए कभी आशियाना न बना सका

खुद तो बहुत से रिश्ते निभाएं अपने जीवन में
मगर कभी
तेरे दिल का रिश्ता न निभा सका 

बाते तो बहुत से की है खुद से भी औरो से भी 
मगर कभी 
तेरे संग कभी प्यार से बतिया न सका

भाषाएं तो बहुत सी सुनी व समझी है
मगर कभी 
तेरे इन आंखों की भाषा समझ न सका 

तारीफे तो बहुत सी सुनी और की है
मगर कभी
तूझे तेरी खुबसूरती का तारीफ सुना न सका 

खुद का मजाक बनाकर मैंने रोते हुए को भी हंसा दिया
मगर कभी
मैंने खुद की हंसी उड़ाकर तूझे हंसा न सका

वक्त को भी वक्त देकर अपने होने का अहसास दिलाया है 
                         मगर कभी
तेरे साथ कभी वक्त बिताने न मिला

चाहत तो बहुत थी तूझे पाने की 
मगर कभी
तूझे अपनी किस्मत से चूरा न सका

मांगा तो दुआवो में तूझे बहुत 
मगर कभी 
भगवान ने मेरी दुआवो में कभी असर दिखा न सका 

और सायद यही कारण है की

पहेलियां तो बहुत सी सुलझाई है मैंने अपने जीवन की
मगर कभी
तेरे दिल की पहेलियां न सुलझा सका

Aateshwar Nishad

Saturday, November 2, 2019

मां

मां🎆
तुम्हें पता है मां क्यों 
मां कहलाती है 
सायद मुझे भी पता नहीं मगर 
                                 मुझे इतना तो पता है की सायाद मां 
उसे कहते है जो हमे जन्म देकर
                               अपनी दूध पिलाकर पालती है तब 
      मां जन्मदात्री कहलाती है

और न जाने क्यों मां बचपन में 
                                  हमारी छोटी छोटी गलतियों पर 
डाटने के बावजुद अपना प्यार दिखलाती है।                       
                          और सायाद यही मां और बच्चे की 
अटूट रिश्ता कहलाती है
                                       छोटे होते है तो हम अपनी 
पैरो के बल पर चलते फिरते गिर जाते तब 
                                       मां हमारी सहारा बन जाती है
भले ही चोट हमें लगती है
                     मगर दर्द मां की आंखों में नजर आ जाती है 
और हम्में आने वाली हर
                       मुसीबतों को मां न जाने कैसे जान जाती है
और उस मुसीबतों से
                        लडने के लिए सामने खड़ी हो जाती है
और न जाने क्यों मां अपनी हर
                                      एक बातों से ज्ञान झलकाती है

मां कितनी भी गुस्से में हो 
                    बड़े प्यार से समझाती है और हमे अपने जीवन की मुसीबतों से लडने के लिए हिम्मत दे जाती है

              और अपने जीवन की अपनी सभी अनुभव बतलाती
और सायाद इसलिए मां हमारे जीवन की
                                                 पहली गुरु कहलाती है

और अचानक हमारे कहीं चले जाने पर मां
                             अपनी आंसू से अपनी चिंता जताती है
मैंने तो कभी भगवान को देखा नहीं मुझे
                             तो अपनी मां में भगवान नजर आती है 
और सायाद मां इसलिए मां कहलाती है।